"Аладдин" сейчас, "Король Лев" к середине лета... Почему компания Disney переснимает свои старые хиты? Вся ли такая продукция основана на эксплуатации ностальгии?
Очень возможно, что так, говорят психологи.
Сильные эмоции
Создатели нового "Короля Льва" во всем следуют оригинальной фабуле мультфильма - истории о львенке Симбе.
Режиссер художественного фильма - Джон Фавро, в 2016 году снявший также римейк "Книги джунглей", которую хвалили как зрители, так и критики.
Помимо "Аладдина" сейчас в кинотеатрах России и мира идет полнометражный фильм о Пикачу - герое японского мультсериала "Покемоны".
Мартовский римейк мультипликационного фильма о слоненке Дамбо стал четвертой переделкой Disney за четыре года - после "Золушки", "Книги джунглей" и "Красавица и чудовище".
"Людям нравится ностальгировать", - говорит преподаватель психологии в Королевском колледже Лондона Вейнанд ван Тилбург. Это может быть сильная эмоция - к которой люди обращаются в трудные времена, считает он.
"Чувство связи между прошлым "я" и настоящим "я" - то, что люди считают очень значимым в своей жизни. Эти ностальгические воспоминания воссоздают приукрашенную картину прошлого, которая заставляет людей чувствовать себя лучше", - рассказывает ван Тилбюрг.
"У многих есть тяга к прошлому, - сказал Би-би-си 22-летний создатель YouTube-канала с обзорами фильмов NitPix Сэмьюэл Джонс. - Большинство выходящих сейчас фильмов - сиквелы или ремейки. Это такой способ отрешиться от реального мира".
Сиквелы - тоже плохо?
Одно из самых популярных видео NitPix - "Мертва ли Pixar". Это жесткая критика: якобы сиквелы студии Pixar - просто бледные тени оригиналов.
"Вас будто спрашивают: а помните такое? - замечает сооснователь NitPix 21-летний Макс Бардсли. - Главное, что сделало их запоминающимися или интересными - переработанные детали оригиналов".
Сэмьюэл и Макс продолжили критиковать Pixar в следующем видео, которое они назвали "Почему "Суперсемейка 2" - плохой сиквел"
"Если вы собираетесь сделать продолжение, вы должны дать нам что-нибудь свежее", - считает Бардсли.
Студия, которая является частью Disney, выпустила одно продолжение среди своих первых десяти фильмов - "Историю игрушек 2".
Из последних десяти фильмов шесть были продолжением, этим летом появится "История игрушек 4".
Безопасное детство
Людей, тянущихся за ностальгическим опытом, можно встретить далеко за пределами кинотеатров.
Эмили Талбут 22 года, она работала в парке развлечений Disney во Флориде в течение двух лет, пока училась в университете.
Она описывает свою работу там как необходимость целый день заставлять людей улыбаться и создавать гостеприимную и дружескую атмосферу.
По словам Эмили, при огромном количестве посетителей с маленькими детьми, было также много взрослых, которые приходили без детей на свидания, мальчишники и девичники.
"Многие из приходящих оставляют своих детей дома, потому что дети не так заинтересованы [в аттракционах с героями Disney], как они", - сказала девушка BBC Radio 1.
Эмили считает, что бегство от реальности - одна из главных причин, по которым людям нравится погружаться в мир грёз "Диснея".
"Это просто желание вернуться в детство", - говорит она. - "Мы смотрели эти фильмы бесчисленное количество раз - так что повторить опыт, но немного по-новому, я думаю, действительно привлекательно".
"Это такой уголок безопасности - вы идёте в парки развлечений, чтобы не видеть внешний мир", - резюмирует Талбут.
"Слишком торопимся"
Как большой поклонник студии Disney, Эмили беспокоится, что римейки потеряют свою привлекательность.
"Так можно потерять эффект новизны, если смотреть одну и ту же историю несколько раз. Не уверена, что впечатление снова может стать "первым", - рассуждает девушка.
Sunday, May 26, 2019
Thursday, May 16, 2019
中美贸易战:从特朗普雷语贴看他的战略战术
进入五月,特朗普和习近平的中美贸易战硝烟滚滚,特朗普正是在他最喜爱的社交媒体推特上打响的第一枪。
我们都知道特朗普很爱发推。回顾一下他近期的"代表贴",也可以看出一些战情战况、战略战术。
遗憾的是, 别说习近平了,日理万机的中国高层领导人中,没有任何一位像特朗普一样活跃在微博、微信或推特这条社交媒体的新战线上。否则,拿出来PK一下,应该也蛮有意思。
古人云,兵无常势。中美贸易战也是且打且停、且打且谈,一波三折,有时候,真是让人跟不上的节奏。
商场如战场,商贾出身的特朗普应该很理解兵无常势的意思。在中美贸易谈判期间,特朗普曾多次在推特上放出消息,一时称"将达成史诗性的协议",一时又威胁提高关税。
2月25日,原定美国提升关税的大限已近(3月1日),特朗普发推说,“贸易协议(还有更多)已经进入后期,我们两国关系很强大,因此我决定推迟提高关税。下面的事,等着瞧?”
推文最后的这一问号颇有意思。或许,经过过去一年和中国的几轮谈判波折之后,特朗普对今后的事也没了把握?
也有分析人士认为,在最后协议签字前,特朗普的所有表态其实都是谈判技巧:讨价还价,让自己的筹码发挥最大的杀伤力,以便最终拿到“最好的价格”。
出其不意
就在中国副总理刘鹤率代表团赴美举行高级谈判之前的最后一瞬间,特朗普突然宣布加征关税,打响贸易战的第一枪。
特朗普同时还责备中美贸易谈判“进展太慢”,"与中国的贸易协议(谈判)在继续,但他们试图重新谈,这太慢了。"
此帖还真有点出其不意、攻其不备的效果。中国、香港股市应声暴跌,贸易谈判前景更是阴霾密布。一时间,人们以为刘鹤肯定不会去美国赴这个“鸿门宴”。
本轮贸易战打响之后,特朗普所发的推特当中,美国从增加关税中获取巨大收益、美国消费者不用买单也是一个反复出现的主题。
5月13日关税生效当天特朗普说,“没有原因表明美国消费者要为关税买单。这一点最近已经证明了,美国付4%,中国21%......”
5月10日特朗普也发帖说,“就是现在,中国在为2500亿美元的商品向美国支付25%的关税,这一大笔钱直接进入美国财政部......”
问题是,特朗普此番宣言也被部分经济学家指责有“瞒天过海”之嫌。因为,关税谁买单这个问题,并没有那么简单。
关税不同于个人所得税——税单来了,照单缴纳,钱进入财政。过高的关税将影响货物的流向,2500亿美元商品中,很多货物可能因为关税上涨而根本不会流入美国,征收的关税也就无从谈起。
我们都知道特朗普很爱发推。回顾一下他近期的"代表贴",也可以看出一些战情战况、战略战术。
遗憾的是, 别说习近平了,日理万机的中国高层领导人中,没有任何一位像特朗普一样活跃在微博、微信或推特这条社交媒体的新战线上。否则,拿出来PK一下,应该也蛮有意思。
古人云,兵无常势。中美贸易战也是且打且停、且打且谈,一波三折,有时候,真是让人跟不上的节奏。
商场如战场,商贾出身的特朗普应该很理解兵无常势的意思。在中美贸易谈判期间,特朗普曾多次在推特上放出消息,一时称"将达成史诗性的协议",一时又威胁提高关税。
2月25日,原定美国提升关税的大限已近(3月1日),特朗普发推说,“贸易协议(还有更多)已经进入后期,我们两国关系很强大,因此我决定推迟提高关税。下面的事,等着瞧?”
推文最后的这一问号颇有意思。或许,经过过去一年和中国的几轮谈判波折之后,特朗普对今后的事也没了把握?
也有分析人士认为,在最后协议签字前,特朗普的所有表态其实都是谈判技巧:讨价还价,让自己的筹码发挥最大的杀伤力,以便最终拿到“最好的价格”。
出其不意
就在中国副总理刘鹤率代表团赴美举行高级谈判之前的最后一瞬间,特朗普突然宣布加征关税,打响贸易战的第一枪。
特朗普同时还责备中美贸易谈判“进展太慢”,"与中国的贸易协议(谈判)在继续,但他们试图重新谈,这太慢了。"
此帖还真有点出其不意、攻其不备的效果。中国、香港股市应声暴跌,贸易谈判前景更是阴霾密布。一时间,人们以为刘鹤肯定不会去美国赴这个“鸿门宴”。
本轮贸易战打响之后,特朗普所发的推特当中,美国从增加关税中获取巨大收益、美国消费者不用买单也是一个反复出现的主题。
5月13日关税生效当天特朗普说,“没有原因表明美国消费者要为关税买单。这一点最近已经证明了,美国付4%,中国21%......”
5月10日特朗普也发帖说,“就是现在,中国在为2500亿美元的商品向美国支付25%的关税,这一大笔钱直接进入美国财政部......”
问题是,特朗普此番宣言也被部分经济学家指责有“瞒天过海”之嫌。因为,关税谁买单这个问题,并没有那么简单。
关税不同于个人所得税——税单来了,照单缴纳,钱进入财政。过高的关税将影响货物的流向,2500亿美元商品中,很多货物可能因为关税上涨而根本不会流入美国,征收的关税也就无从谈起。
Tuesday, May 7, 2019
كيف يفكر الشخص المتطرف؟
على مدى السنوات القليلة الماضية، زادت المخاوف حيال صعود التيار اليميني المتطرف والنازيين الجدد والتنظيمات الفاشية. وأثارت الأحداث الأخيرة، مثل عملية دهس المتظاهرين السلميين في مدينة شارلوتسفيل الأمريكية وما تلاها من أعمال عنف في عام 2017، أو موجة أعمال العنف التي شهدتها مدينة كيمنتس الألمانية عام 2018، أو الهجوم الإرهابي الأخير في مدينة كرايست تشيرش في نيوزيلندا، تساؤلات حول سبل إيقاف انتشار الفكر المتطرف.
واهتمت بضعة مؤسسات في الآونة الأخيرة بالتصدي للفكر المتطرف من خلال التركيز على الأسباب الاجتماعية التي تدفع البعض للانضمام للتنظيمات المتطرفة واليمينية التي تنتهج العنف، والبحث عن طرق لإقناعهم بالتخلي عن الفكر المتطرف.
ويعد مشروع "إيكسيت نورواي"، واحدا من هذه المؤسسات التي تتصدى للفكر المتطرف. ووضع هذا المشروع، الذي أسسه باحثان بأكاديمية الشرطة النرويجية عام 1997، ثلاثة أهداف رئيسية: "أولها إقامة شبكات محلية لدعم آباء وأمهات الأطفال الذين انضموا لجماعات عنصرية أو عنيفة، والسماح للشباب بالانشقاق عن هذه الجماعات، وأخيرا نشر معلومات منهجية للمختصين الذين يعملون مع شباب لهم صلة بجماعات تنتهج العنف".
وتوسعت المؤسسة في مختلف بلدان أوروبا. لكن مؤسسة"إيكسيت" لا تساعد سوى أعضاء التنظيمات المتطرفة الذين أبدوا رغبة في الانشقاق عنها. وتقول فابيان ويتشمان، المشرفة على الحالات بمؤسسة "إيكسيت" في ألمانيا: " يجب أن يتصل الشخص بنا من تلقاء نفسه عبر الهاتف أو بالبريد الإلكتروني أو بالحضور شخصيا، ثم نتحقق من مدى صدق نيته في الانشقاق عن هذه الجماعات. ولا يكفي أن يحاول المتطرف السابق أن يخفي ماضيه، بل يجب أن يبدي ندما وإصرارا على تغيير سلوكياته".
وتساعد المؤسسة الشخص في التخلي عن الفكر اليميني المتطرف، وتبحث في العراقيل الاجتماعية والنفسية والعاطفية والقانونية التي تحول دون انفصال الشخص عن تنظيم بعينه. وتعمل المؤسسة بسرية تامة على تذليل هذه العقبات. ويدير هذه العملية فريق من المتطرفين السابقين، كانوا أعضاء في التنظيمات اليمينية المتطرفة.
لا تبدأ مؤسسة "إيكسيت" عملية إعادة تأهيل المتطرفين السابقين بإثنائهم عن الفكر المتطرف، إذ يرى مايكل كيميل، مؤلف كتاب "التعافي من الكراهية" الذي سلط فيه الضوء على مؤسسة "إيكسيت"، أن فكر التنظيمات اليمينية المتطرفة ليس من العوامل المهمة التي تجذب الشباب للانضمام إليها، حتى إن أكثر المشاركين لم يتمكنوا من تفسير فكر التنظيمات التي ينتمون إليها.
وعارض البعض هذه الطريقة في التصدي للتطرف، وبرروا معارضتهم بأن التركيز على أسباب أخرى غير الفكر المتطرف يتيح للمتطرفين التنصل من المسؤولية عن أفكارهم وسلوكياتهم المتطرفة في الماضي والحاضر. غير أن كيميل يرى أن دراسة تجربة كل عضو من أعضاء التنظيمات المتطرفة على حدة والتعامل معها بشكل مستقل ستساعدنا في تشجيعه على الانفصال عن التنظيم.
وإذا نظرنا مثلا إلى حالة روبرت أوريل، الذي كان عضوا في تنظيم يميني متطرف وأضحى الآن عضوا في مؤسسة "إيكسيت" في السويد لاجتثاث الفكر المتطرف، سنجد أنه أمضى السنوات الماضية في الترويج لأهداف المؤسسة والمساعدة في بناء مؤسسات مشابهة حول العالم.
ويقول أوريل إن انضمامه لجماعة متطرفة كان بسبب سلوكياته المنحرفة في مرحلة المراهقة، وتدني تقديره لذاته، إذ دأب على التشاجر والتنازع مع الأخرين. ويقول أوريل: "نشأت في قلب مدينة ستوكهولم، التي يعد سكانها من الطبقة الوسطى، وكنا نتعارك أيام الجمعة والسبت في نادي الشباب مع مجموعات من الشباب الذين يسكنون الضواحي".
ولعبت التنظيمات اليمينية المتطرفة على وتر العزلة التي كان يشعر بها في مرحلة المراهقة. ويقول أوريل إن عقيدة التطرف تقوم على ثلاثة ركائز مستقلة.
أولا، زرع بذور التفرقة بتقسيم العالم إلى معسكرين، وفي هذا الحالة كان المعسكر الخيّر يضم البيض، ومعسكر الأشرار يضم المهاجرين واليهود وكل الأعراق الأخرى. وهذا يقودنا إلى الركيزة الثانية، وهي الاستعلاء العرقي، إذ يقول أوريل إن الجماعات المتطرفة تروج للنظرة الدونية للآخر، كوسيلة لاستعادة الثقة بالنفس وتقدير الذات، وتقوية مشاعر السطوة والانتماء والجماعة.
وفي النهاية تعمد هذه الجماعات المتطرفة إلى تجريد الآخر من إنسانيته، مثل وصف المهاجرين بأنهم جرذان، لتبرير أعمال العنف ضدهم.
وأخيرا تعمل هذه التنظيمات المتطرفة على إذكاء مشاعر الانتماء. ويقول أوريل: "إن أفراد هذه الجماعات لديهم إحساس قوي بالهدف، وهذا ينطبق على جماعات البيض والجماعات الإسلامية المتطرفة التي تنتهج العنف أو حتى العصابات. وقد رأيت بنفسي أن الإحساس بالولاء للجماعة، يجعل الكثير من أعضائها يشعرون أن لديهم إخوة على استعداد للتضحية بحياتهم في سبيلهم، ولديهم قضية قد يخاطرون بحياتهم من أجلها".
لكن أوريل فوجئ بازدواجية معايير أعضاء التنظيم. ففي الوقت الذي كانوا فيه يروجون للانضباط، كانوا يشربون الخمر ويقيمون الحفلات ويتعاطون المنشطات. وزادت مشاعر النفور منهم بعدما انضم إلى الجيش، حيث جرب بنفسه الانضباط الحقيقي والإحساس بالهدف دون الحض على الكراهية. وساعده الابتعاد عن معارفه السابقين لفترات طويلة في اتخاذ قرار الانفصال.
ويقول أوريل: "إن الحياة العسكرية جعلتني أشعر بتقدير الذات والرضا عن النفس ولم أعد أحتاج لمشاعر التفوق العرقي، أو الكراهية. وقد ساعدني الانفتاح الفكري والعاطفي في تقبّل الأخرين الذين كنت أناصبهم العداء في السابق والتعامل معهم بطريقة مختلفة".
وفي كتابه "العنف العنصري واليميني المتطرف في الدول الاسكندنافية"، يرى المؤلف تور بيورغو أن هناك مجموعة من "عوامل الدفع والجذب" التي قد تدفع الناس للانشقاق عن التنظيمات المتطرفة. وكثيرا ما تتضمن عوامل الدفع التشكك في فكر التنظيم واكتشاف التعارض بين الفكر والسلوكيات، أو الاصطدام بالقيادة أو الأعضاء أو ببساطة الشعور بالإنهاك، بينما تتضمن عوامل الجذب وجود أعضاء في التنظيم بين أفراد العائلة أو في مكان العمل أو في السجون.
منحنى الانخراط في الجماعة
كتب جون هورغان وماري بيث ألتير في دورية "العلوم السلوكية للإرهاب والعداء السياسي" عن مسار أو منحنى التطرف، وقالا إنه يتكون من ثلاث مراحل، أولا الانضمام إلى الجماعة المتطرفة ثم الانخراط في أنشطتها ثم الانشقاق عنها. ويستحيل أن نفهم أسباب الانشقاق من دون أن ندرس العوامل التي أدت إلى الانضمام في المقام الأول.
ولنأخذ مثالا على ذلك بتجربة سارة (ليس اسمها الحقيقي)، في الانضمام إلى تنظيم يميني متطرف في الولايات المتحدة ثم الانشقاق عنه لاحقا. إذ تقول سارة إن أبويها كانا ملتزمين للغاية من الناحية الدينية لكن سلوكياتهما كانت على النقيض من ذلك تماما، إذ كانا مدمنين للخمر. وتوترت علاقتها بأبيها، ما دفعها إلى انتهاج سلوكيات معادية للمجتمع منذ الصغر.
وفي مرحلة المراهقة، تطورت لديها ميول جنسية مثلية، ما زاد الفجوة بينها وبين عائلتها. ثم تراكمت لديها تدريجيا مشاعر الارتباك والغضب والتحيز. وعندما التقت أعضاء في تنظيم عنصري متشدد في المدرسة الثانوية، انضمت إليهم على الفور، كوسيلة للتنفيس عن هذه المشاعر. وشيئا فشيئا زاد ولاؤها للتنظيم.
وبدأت عملية الانسحاب من التنظيم بعد أن اعتقلت على خلفية ضلوعها في عملية سطو. وانفصلت نفسيا عن أصدقائها القدامى، وصادقت نزلاء في السجن من أصول لاتينية وأفريقية، ما دعاها للارتياب في معتقداتها السابقة. ويصف أوريل ذلك بأنه التعرض لـ "دماثة الخلق غير المتوقعة"، حين يظهر الأشخاص الذين كنت تعدهم من الأعداء سابقا، سلوكيات حميدة تحث الأخرين على إعادة النظر في معتقداتهم.
ومهما اختلفت الأسباب التي تؤدي إلى نبذ التطرف، فإن الباحثين يُجمعون على أن الابتعاد بدنيا ونفسيا عن أفراد الجماعة هو خطوة ضرورية لاجتثاث الأفكار المتطرفة وإعادة النظر في العوامل التي أدت إلى الانضمام إلى الجماعة.
ويرى أوليفر روي في كتابه "الجهاد والموت"، أن الجهاديين المعاصرين الذين شنوا هجمات إرهابية في أوروبا تحديدا، لم يدفعهم الفكر المتطرف في حد ذاته للانضمام إلى الجماعات الإسلامية المتطرفة بقدر ما دفعهم إلى الانضمام إليها إنكار القوانين والقيم في المجتمع، الذي تطور لديهم بعد سنوات من العزلة الاجتماعية والانفصال عن الواقع والتمرد.
واهتمت بضعة مؤسسات في الآونة الأخيرة بالتصدي للفكر المتطرف من خلال التركيز على الأسباب الاجتماعية التي تدفع البعض للانضمام للتنظيمات المتطرفة واليمينية التي تنتهج العنف، والبحث عن طرق لإقناعهم بالتخلي عن الفكر المتطرف.
ويعد مشروع "إيكسيت نورواي"، واحدا من هذه المؤسسات التي تتصدى للفكر المتطرف. ووضع هذا المشروع، الذي أسسه باحثان بأكاديمية الشرطة النرويجية عام 1997، ثلاثة أهداف رئيسية: "أولها إقامة شبكات محلية لدعم آباء وأمهات الأطفال الذين انضموا لجماعات عنصرية أو عنيفة، والسماح للشباب بالانشقاق عن هذه الجماعات، وأخيرا نشر معلومات منهجية للمختصين الذين يعملون مع شباب لهم صلة بجماعات تنتهج العنف".
وتوسعت المؤسسة في مختلف بلدان أوروبا. لكن مؤسسة"إيكسيت" لا تساعد سوى أعضاء التنظيمات المتطرفة الذين أبدوا رغبة في الانشقاق عنها. وتقول فابيان ويتشمان، المشرفة على الحالات بمؤسسة "إيكسيت" في ألمانيا: " يجب أن يتصل الشخص بنا من تلقاء نفسه عبر الهاتف أو بالبريد الإلكتروني أو بالحضور شخصيا، ثم نتحقق من مدى صدق نيته في الانشقاق عن هذه الجماعات. ولا يكفي أن يحاول المتطرف السابق أن يخفي ماضيه، بل يجب أن يبدي ندما وإصرارا على تغيير سلوكياته".
وتساعد المؤسسة الشخص في التخلي عن الفكر اليميني المتطرف، وتبحث في العراقيل الاجتماعية والنفسية والعاطفية والقانونية التي تحول دون انفصال الشخص عن تنظيم بعينه. وتعمل المؤسسة بسرية تامة على تذليل هذه العقبات. ويدير هذه العملية فريق من المتطرفين السابقين، كانوا أعضاء في التنظيمات اليمينية المتطرفة.
لا تبدأ مؤسسة "إيكسيت" عملية إعادة تأهيل المتطرفين السابقين بإثنائهم عن الفكر المتطرف، إذ يرى مايكل كيميل، مؤلف كتاب "التعافي من الكراهية" الذي سلط فيه الضوء على مؤسسة "إيكسيت"، أن فكر التنظيمات اليمينية المتطرفة ليس من العوامل المهمة التي تجذب الشباب للانضمام إليها، حتى إن أكثر المشاركين لم يتمكنوا من تفسير فكر التنظيمات التي ينتمون إليها.
وعارض البعض هذه الطريقة في التصدي للتطرف، وبرروا معارضتهم بأن التركيز على أسباب أخرى غير الفكر المتطرف يتيح للمتطرفين التنصل من المسؤولية عن أفكارهم وسلوكياتهم المتطرفة في الماضي والحاضر. غير أن كيميل يرى أن دراسة تجربة كل عضو من أعضاء التنظيمات المتطرفة على حدة والتعامل معها بشكل مستقل ستساعدنا في تشجيعه على الانفصال عن التنظيم.
وإذا نظرنا مثلا إلى حالة روبرت أوريل، الذي كان عضوا في تنظيم يميني متطرف وأضحى الآن عضوا في مؤسسة "إيكسيت" في السويد لاجتثاث الفكر المتطرف، سنجد أنه أمضى السنوات الماضية في الترويج لأهداف المؤسسة والمساعدة في بناء مؤسسات مشابهة حول العالم.
ويقول أوريل إن انضمامه لجماعة متطرفة كان بسبب سلوكياته المنحرفة في مرحلة المراهقة، وتدني تقديره لذاته، إذ دأب على التشاجر والتنازع مع الأخرين. ويقول أوريل: "نشأت في قلب مدينة ستوكهولم، التي يعد سكانها من الطبقة الوسطى، وكنا نتعارك أيام الجمعة والسبت في نادي الشباب مع مجموعات من الشباب الذين يسكنون الضواحي".
ولعبت التنظيمات اليمينية المتطرفة على وتر العزلة التي كان يشعر بها في مرحلة المراهقة. ويقول أوريل إن عقيدة التطرف تقوم على ثلاثة ركائز مستقلة.
أولا، زرع بذور التفرقة بتقسيم العالم إلى معسكرين، وفي هذا الحالة كان المعسكر الخيّر يضم البيض، ومعسكر الأشرار يضم المهاجرين واليهود وكل الأعراق الأخرى. وهذا يقودنا إلى الركيزة الثانية، وهي الاستعلاء العرقي، إذ يقول أوريل إن الجماعات المتطرفة تروج للنظرة الدونية للآخر، كوسيلة لاستعادة الثقة بالنفس وتقدير الذات، وتقوية مشاعر السطوة والانتماء والجماعة.
وفي النهاية تعمد هذه الجماعات المتطرفة إلى تجريد الآخر من إنسانيته، مثل وصف المهاجرين بأنهم جرذان، لتبرير أعمال العنف ضدهم.
وأخيرا تعمل هذه التنظيمات المتطرفة على إذكاء مشاعر الانتماء. ويقول أوريل: "إن أفراد هذه الجماعات لديهم إحساس قوي بالهدف، وهذا ينطبق على جماعات البيض والجماعات الإسلامية المتطرفة التي تنتهج العنف أو حتى العصابات. وقد رأيت بنفسي أن الإحساس بالولاء للجماعة، يجعل الكثير من أعضائها يشعرون أن لديهم إخوة على استعداد للتضحية بحياتهم في سبيلهم، ولديهم قضية قد يخاطرون بحياتهم من أجلها".
لكن أوريل فوجئ بازدواجية معايير أعضاء التنظيم. ففي الوقت الذي كانوا فيه يروجون للانضباط، كانوا يشربون الخمر ويقيمون الحفلات ويتعاطون المنشطات. وزادت مشاعر النفور منهم بعدما انضم إلى الجيش، حيث جرب بنفسه الانضباط الحقيقي والإحساس بالهدف دون الحض على الكراهية. وساعده الابتعاد عن معارفه السابقين لفترات طويلة في اتخاذ قرار الانفصال.
ويقول أوريل: "إن الحياة العسكرية جعلتني أشعر بتقدير الذات والرضا عن النفس ولم أعد أحتاج لمشاعر التفوق العرقي، أو الكراهية. وقد ساعدني الانفتاح الفكري والعاطفي في تقبّل الأخرين الذين كنت أناصبهم العداء في السابق والتعامل معهم بطريقة مختلفة".
وفي كتابه "العنف العنصري واليميني المتطرف في الدول الاسكندنافية"، يرى المؤلف تور بيورغو أن هناك مجموعة من "عوامل الدفع والجذب" التي قد تدفع الناس للانشقاق عن التنظيمات المتطرفة. وكثيرا ما تتضمن عوامل الدفع التشكك في فكر التنظيم واكتشاف التعارض بين الفكر والسلوكيات، أو الاصطدام بالقيادة أو الأعضاء أو ببساطة الشعور بالإنهاك، بينما تتضمن عوامل الجذب وجود أعضاء في التنظيم بين أفراد العائلة أو في مكان العمل أو في السجون.
منحنى الانخراط في الجماعة
كتب جون هورغان وماري بيث ألتير في دورية "العلوم السلوكية للإرهاب والعداء السياسي" عن مسار أو منحنى التطرف، وقالا إنه يتكون من ثلاث مراحل، أولا الانضمام إلى الجماعة المتطرفة ثم الانخراط في أنشطتها ثم الانشقاق عنها. ويستحيل أن نفهم أسباب الانشقاق من دون أن ندرس العوامل التي أدت إلى الانضمام في المقام الأول.
ولنأخذ مثالا على ذلك بتجربة سارة (ليس اسمها الحقيقي)، في الانضمام إلى تنظيم يميني متطرف في الولايات المتحدة ثم الانشقاق عنه لاحقا. إذ تقول سارة إن أبويها كانا ملتزمين للغاية من الناحية الدينية لكن سلوكياتهما كانت على النقيض من ذلك تماما، إذ كانا مدمنين للخمر. وتوترت علاقتها بأبيها، ما دفعها إلى انتهاج سلوكيات معادية للمجتمع منذ الصغر.
وفي مرحلة المراهقة، تطورت لديها ميول جنسية مثلية، ما زاد الفجوة بينها وبين عائلتها. ثم تراكمت لديها تدريجيا مشاعر الارتباك والغضب والتحيز. وعندما التقت أعضاء في تنظيم عنصري متشدد في المدرسة الثانوية، انضمت إليهم على الفور، كوسيلة للتنفيس عن هذه المشاعر. وشيئا فشيئا زاد ولاؤها للتنظيم.
وبدأت عملية الانسحاب من التنظيم بعد أن اعتقلت على خلفية ضلوعها في عملية سطو. وانفصلت نفسيا عن أصدقائها القدامى، وصادقت نزلاء في السجن من أصول لاتينية وأفريقية، ما دعاها للارتياب في معتقداتها السابقة. ويصف أوريل ذلك بأنه التعرض لـ "دماثة الخلق غير المتوقعة"، حين يظهر الأشخاص الذين كنت تعدهم من الأعداء سابقا، سلوكيات حميدة تحث الأخرين على إعادة النظر في معتقداتهم.
ومهما اختلفت الأسباب التي تؤدي إلى نبذ التطرف، فإن الباحثين يُجمعون على أن الابتعاد بدنيا ونفسيا عن أفراد الجماعة هو خطوة ضرورية لاجتثاث الأفكار المتطرفة وإعادة النظر في العوامل التي أدت إلى الانضمام إلى الجماعة.
ويرى أوليفر روي في كتابه "الجهاد والموت"، أن الجهاديين المعاصرين الذين شنوا هجمات إرهابية في أوروبا تحديدا، لم يدفعهم الفكر المتطرف في حد ذاته للانضمام إلى الجماعات الإسلامية المتطرفة بقدر ما دفعهم إلى الانضمام إليها إنكار القوانين والقيم في المجتمع، الذي تطور لديهم بعد سنوات من العزلة الاجتماعية والانفصال عن الواقع والتمرد.
Friday, May 3, 2019
कुंभ में 'भक्तिमय' के बाद 'कचरामय' हुआ मेला क्षेत्र
प्रयागराज में क़रीब 50 दिन तक चले कुंभ मेले के दौरान सरकार ने मेले के इंतज़ाम और साफ़-सफ़ाई की व्यवस्था को लेकर ख़ूब वाहवाही लूटी लेकिन मेला बीत जाने के क़रीब डेढ़ महीने बाद भी मेला क्षेत्र का न तो कचरा पूरी तरह से हटाया जा सका है और न ही हटाए गए कचरे का पूरी तरह से निस्तारण हो सका है.
यही नहीं, पूरे मेला क्षेत्र में जगह-जगह मल-मूत्र, प्लास्टिक, पुआल और कई अन्य तरह के कचरे या तो मेला क्षेत्र में ही गड्ढों में भरकर ऊपर से बालू और मिट्टी डालकर बंद कर दिए गए हैं या फिर उन्हें जला दिया गया है.
हालांकि मेला प्रशासन का दावा है कि ज़्यादातर कचरा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स तक पहुंचा दिया गया है और मेला क्षेत्र में अब कोई कचरा नहीं है लेकिन वास्तविक सच्चाई इससे अलग है. यहां तक कि संगम के बिल्कुल क़रीब भी जलाए गए और रेत में दबाए गए कचरों के अवशेष दूर से ही दिख जाते हैं.
उजड़े हुए मेला क्षेत्र में जगह-जगह चकर्ड प्लेट्स, बिखरी हुई ईंटें और उजड़े हुए अस्थाई आशियानों की तमाम निशानियां दिख जाएंगी लेकिन इन सबके बीच जो सबसे ख़तरनाक निशानी दिख रही है, वह है ठोस कचरे के जगह-जगह पड़े ढेर और बरसात के मौसम में उनसे होने वाली बीमारियों की आशंका.
संगम नोज़ के पास सुबह दस-ग्यारह बजे भी इतनी तेज़ धूप है कि बाहर पैदल चलना मुश्किल है लेकिन संगम स्नान करने आए श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं दिखती.
ठीक संगम नोज़ के पास दो-तीन जगह कूड़े के बड़े ढेर लगे हुए हैं. पास आकर साफ़ दिखता है कि बड़ी मात्रा में कचरे को मिट्टी और बालू से ढकने की कोशिश की गई है और फिर ऊपर से आग लगा दी गई है ताकि पॉलिथिन, कागज़ इत्यादि की बनी चीज़ें जल जाएं.
कचरे से निकलने वाली और फिर उसके जलने की दुर्गंध से पास खड़ा होना भी मुश्किल रहता है. इसके अलावा संगम के उस पार अरैल क्षेत्र में तंबुओं का शहर उजड़ने के बाद कई तरह के अवशेष पड़े हुए हैं.
शौचालयों की गंदगी भी कुछ जगहों पर बिना साफ़ किए वहीं छोड़ दी गई है. स्थानीय नागरिक वीरेश सोनकर बताते हैं, "मेला ख़त्म होने के बाद तो गंगाजी और यमुना जी की भी सफ़ाई नहीं हुई है. आप देख सकते हैं कि मेले के दौरान नदियों में कितनी सफ़ाई थी और अब जगह-जगह आपको गंदगी दिखेगी."
कुंभ मेले के दौरान निकले बड़े पैमाने पर इस गंदगी और इसके निस्तारण में कथित लापरवाही को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने भी पिछले दिनों राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी थी.
बताया जा रहा है कि उसके बाद मेला प्रशासन और नगर निगम ने कूड़ा और गंदगी को वहां से हटाने में काफ़ी तेज़ी दिखाई है, बावजूद इसके, अभी तक पूरी तरह से कचरा नहीं हट सका है.
संगम किनारे स्थित कुछ तीर्थ पुरोहितों और नाविकों से बात करने पर पता चलता है कि गंदगी की सफ़ाई तो हुई है लेकिन सिर्फ़ संगम और आस-पास के इलाक़ों में ही.
क़रीब 25 साल से संगम में नाव चलाने वाले महावीर निषाद बताते हैं, "जितनी बढ़िया व्यवस्था मेला के समय हुई थी, मेला ख़त्म होने के बाद उतनी ही ज़्यादा अव्यवस्था देखने को मिल रही है. कहीं कोई गंदगी नहीं हटाई गई है. जो शौचालय प्लास्टिक वाले बने थे, उन्हें हटा दिया गया और गंदगी वहीं की वहीं मिट्टी से ढक दी गई है."
वहीं पास में ही खड़े एक अन्य नाविक ने हँसते हुए कहा, "जरूरतै का है. गंगा मइया बरसात में सब कचड़ा ख़ुदै बहाइ लइ जइहैं."
मेरे साथ खड़े एक स्थानीय पत्रकार बोले, "नाविक इस बात को भले ही मज़ाक़ में बोल रहे हैं लेकिन प्रशासन वास्तव में यही इंतज़ार कर रहा है कि बाढ़ में बालू के अंदर जमा कचरा ख़ुद ब ख़ुद साफ़ हो जाएगा."
मेला अधिकारी विजय किरन आनंद ने बीबीसी को बताया कि कचरा पूरी तरह से हटाया जा चुका है और कचरे को जलाने की बातें तो बिल्कुल बेबुनियाद हैं. वो कहते हैं कि जलाने की घटना को कुछ शरारती तत्वों ने अंजाम दिया था, प्रशासन का उससे कोई लेना-देना नहीं है.
विजय किरन आनंद बताते हैं, "मेला क्षेत्र से ज़्यादातर कचरा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स में भेजा जा चुका है. बसवार में नगर निगम का प्लांट है जो 2015 से चल रहा है.''
''हालांकि वहां 60,000 मीट्रिक टन कचरा काफ़ी दिनों से है लेकिन मेले के दौरान 9,000 मीट्रिक टन कचरा भी वहां गया था और उसके ट्रीटमेंट का काम चल रहा है. लेकिन यह क्षेत्र पूरी तरह से रिहायशी इलाक़े से काफ़ी दूर है, वहां किसी तरह की संक्रामक बीमारी का कोई ख़तरा नहीं है."
विजय किरन आनंद ने बताया कि पूरे क्षेत्र में अभी भी कूड़ा और मल-मूत्र हटाने का काम चल रहा है जिसकी दिन-प्रतिदिन निगरानी हो रही है. उनका दावा है कि बहुत जल्दी ही बची हुई गंदगी भी वहां से हटा दी जाएगी क्योंकि गंदगी सारी मेले के दौरान ही जमा हुई है, अब वहां गंदगी नहीं है.
जहां तक मेला क्षेत्र से गंदगी हटाने का सवाल है तो छोटी गाड़ियों, रिक्शा ट्रालियों पर गंदगी लादकर बाहर ले जाते हुए लोग कड़ी धूप में ही वहां देखे जा सकते हैं.
यही नहीं, पूरे मेला क्षेत्र में जगह-जगह मल-मूत्र, प्लास्टिक, पुआल और कई अन्य तरह के कचरे या तो मेला क्षेत्र में ही गड्ढों में भरकर ऊपर से बालू और मिट्टी डालकर बंद कर दिए गए हैं या फिर उन्हें जला दिया गया है.
हालांकि मेला प्रशासन का दावा है कि ज़्यादातर कचरा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स तक पहुंचा दिया गया है और मेला क्षेत्र में अब कोई कचरा नहीं है लेकिन वास्तविक सच्चाई इससे अलग है. यहां तक कि संगम के बिल्कुल क़रीब भी जलाए गए और रेत में दबाए गए कचरों के अवशेष दूर से ही दिख जाते हैं.
उजड़े हुए मेला क्षेत्र में जगह-जगह चकर्ड प्लेट्स, बिखरी हुई ईंटें और उजड़े हुए अस्थाई आशियानों की तमाम निशानियां दिख जाएंगी लेकिन इन सबके बीच जो सबसे ख़तरनाक निशानी दिख रही है, वह है ठोस कचरे के जगह-जगह पड़े ढेर और बरसात के मौसम में उनसे होने वाली बीमारियों की आशंका.
संगम नोज़ के पास सुबह दस-ग्यारह बजे भी इतनी तेज़ धूप है कि बाहर पैदल चलना मुश्किल है लेकिन संगम स्नान करने आए श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं दिखती.
ठीक संगम नोज़ के पास दो-तीन जगह कूड़े के बड़े ढेर लगे हुए हैं. पास आकर साफ़ दिखता है कि बड़ी मात्रा में कचरे को मिट्टी और बालू से ढकने की कोशिश की गई है और फिर ऊपर से आग लगा दी गई है ताकि पॉलिथिन, कागज़ इत्यादि की बनी चीज़ें जल जाएं.
कचरे से निकलने वाली और फिर उसके जलने की दुर्गंध से पास खड़ा होना भी मुश्किल रहता है. इसके अलावा संगम के उस पार अरैल क्षेत्र में तंबुओं का शहर उजड़ने के बाद कई तरह के अवशेष पड़े हुए हैं.
शौचालयों की गंदगी भी कुछ जगहों पर बिना साफ़ किए वहीं छोड़ दी गई है. स्थानीय नागरिक वीरेश सोनकर बताते हैं, "मेला ख़त्म होने के बाद तो गंगाजी और यमुना जी की भी सफ़ाई नहीं हुई है. आप देख सकते हैं कि मेले के दौरान नदियों में कितनी सफ़ाई थी और अब जगह-जगह आपको गंदगी दिखेगी."
कुंभ मेले के दौरान निकले बड़े पैमाने पर इस गंदगी और इसके निस्तारण में कथित लापरवाही को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने भी पिछले दिनों राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी थी.
बताया जा रहा है कि उसके बाद मेला प्रशासन और नगर निगम ने कूड़ा और गंदगी को वहां से हटाने में काफ़ी तेज़ी दिखाई है, बावजूद इसके, अभी तक पूरी तरह से कचरा नहीं हट सका है.
संगम किनारे स्थित कुछ तीर्थ पुरोहितों और नाविकों से बात करने पर पता चलता है कि गंदगी की सफ़ाई तो हुई है लेकिन सिर्फ़ संगम और आस-पास के इलाक़ों में ही.
क़रीब 25 साल से संगम में नाव चलाने वाले महावीर निषाद बताते हैं, "जितनी बढ़िया व्यवस्था मेला के समय हुई थी, मेला ख़त्म होने के बाद उतनी ही ज़्यादा अव्यवस्था देखने को मिल रही है. कहीं कोई गंदगी नहीं हटाई गई है. जो शौचालय प्लास्टिक वाले बने थे, उन्हें हटा दिया गया और गंदगी वहीं की वहीं मिट्टी से ढक दी गई है."
वहीं पास में ही खड़े एक अन्य नाविक ने हँसते हुए कहा, "जरूरतै का है. गंगा मइया बरसात में सब कचड़ा ख़ुदै बहाइ लइ जइहैं."
मेरे साथ खड़े एक स्थानीय पत्रकार बोले, "नाविक इस बात को भले ही मज़ाक़ में बोल रहे हैं लेकिन प्रशासन वास्तव में यही इंतज़ार कर रहा है कि बाढ़ में बालू के अंदर जमा कचरा ख़ुद ब ख़ुद साफ़ हो जाएगा."
मेला अधिकारी विजय किरन आनंद ने बीबीसी को बताया कि कचरा पूरी तरह से हटाया जा चुका है और कचरे को जलाने की बातें तो बिल्कुल बेबुनियाद हैं. वो कहते हैं कि जलाने की घटना को कुछ शरारती तत्वों ने अंजाम दिया था, प्रशासन का उससे कोई लेना-देना नहीं है.
विजय किरन आनंद बताते हैं, "मेला क्षेत्र से ज़्यादातर कचरा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स में भेजा जा चुका है. बसवार में नगर निगम का प्लांट है जो 2015 से चल रहा है.''
''हालांकि वहां 60,000 मीट्रिक टन कचरा काफ़ी दिनों से है लेकिन मेले के दौरान 9,000 मीट्रिक टन कचरा भी वहां गया था और उसके ट्रीटमेंट का काम चल रहा है. लेकिन यह क्षेत्र पूरी तरह से रिहायशी इलाक़े से काफ़ी दूर है, वहां किसी तरह की संक्रामक बीमारी का कोई ख़तरा नहीं है."
विजय किरन आनंद ने बताया कि पूरे क्षेत्र में अभी भी कूड़ा और मल-मूत्र हटाने का काम चल रहा है जिसकी दिन-प्रतिदिन निगरानी हो रही है. उनका दावा है कि बहुत जल्दी ही बची हुई गंदगी भी वहां से हटा दी जाएगी क्योंकि गंदगी सारी मेले के दौरान ही जमा हुई है, अब वहां गंदगी नहीं है.
जहां तक मेला क्षेत्र से गंदगी हटाने का सवाल है तो छोटी गाड़ियों, रिक्शा ट्रालियों पर गंदगी लादकर बाहर ले जाते हुए लोग कड़ी धूप में ही वहां देखे जा सकते हैं.
Subscribe to:
Comments (Atom)